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अर्जुन देवांगन क़ि रिपोर्ट : धनोरा में आठ परिवार ने सामाजिक और धार्मिक रूप से अपने मूल धर्म में वापसी

धनोरा में आठ परिवार ने सामाजिक और धार्मिक रूप से अपने मूल धर्म में वापसी

नारायणपुर: जिले में आठ परिवार ने सामाजिक और धार्मिक रूप से अपने मूल धर्म में वापसी की 84परगना छोटेडोंगर क्षेत्र में दिनांक 11/05/2026 को ग्राम धनोरा एवं ग्राम जम्हरी, ग्राम पंचायत धनोरा, तहसील छोटेडोंगर में सामाजिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन परिवारों का पारंपरिक रीति-रिवाज एवं आदिवासी संस्कृति के अनुसार पुनः अपने मूल धर्म एवं समाज में स्वागत किया गया,

समाज के वरिष्ठजनों, मांझी-मुखिया एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में पारंपरिक पूजा-पाठ, रीति-नीति एवं सामाजिक विधि-विधान के साथ उन्हें पुनः समाज में सम्मिलित किया गया।

पुनः मूल धर्म एवं समाज में सम्मिलित होने वाले परिवारों के नाम ग्राम धनोरा से लक्ष्मीनाथ उसेंडी,माता श्रीमती मशी उसेंडी,भुनेश्वर उसेंडी, फूलमती उसेंडी एवं ग्राम जम्हरी से श्री रानू उसेंडी,सोनाया उसेंडी,श्रीमती रामदाई उसेंडी,रुचि उसेंडी जो वर्षों पहले स्वास्थ्य समस्याओं और मिशनरी प्रार्थना सभाओं के प्रभाव में आकर परिवार ने क्रिश्चन धर्म अपनाया था. रामदाई उसेंडी ने बताया कि कई वर्षों पहले उके परिवार के सदस्य का स्वास्थ्य लगातार खराब होने लगा था. स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें लगने लगा था कि शायद वे जीवित नहीं बचेंगे इसी दौरान गांव और आसपास क्षेत्रों में आयोजित प्रार्थना सभाओं और चंगाई कार्यक्रमों के बारे में उन्होंने सुना, जहां यह दावा किया जाता था कि प्रार्थना से गंभीर बीमारियां ठीक हो जाती हैं.

परिवार की परेशानियों और बीमारी से परेशान होकर पति हमें मिशनरी सभाओं में ले गए थे. धीरे-धीरे अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों से दूरी बना ली और क्रिश्चन धर्म को स्वीकार कर लिया था.

पति की मृत्यु के बाद लिया बड़ा निर्णय

रामदाई उसेंडी ने कहा कि उनके पति अब इस दुनिया में नहीं हैं. पति के निधन के बाद उन्होंने अपने जीवन और परंपराओं को लेकर गंभीरता से विचार किया. इसी दौरान समाज में धर्म स्वतंत्रता कानून और धार्मिक जागरूकता को लेकर चल रहे अभियानों का प्रभाव भी उन पर पड़ा. उन्होंने अपने पूरे परिवार के साथ सामाजिक जनों के सामने मूल धर्म में वापसी की घोषणा की.

रामदाई उसेंडी ने स्पष्ट कहा कि अब वे और उनका परिवार भविष्य में कभी भी अपने मूल धर्म को नहीं छोड़ेंगे. वे अपनी संस्कृति, परंपरा और देवी-देवताओं में पूर्ण आस्था रखती हैं. मूल धर्म में वापसी के दौरान समाज के लोगों ने परिवार का तिलक लगाकर स्वागत किया ।

गायन्ता प्रदीप उसेंडी, जिला सदस्य राकेश उसेण्डी, पुजारी कराटी उसेंडी, बैगा धनसिंह सलाम, फरदेन उसेंडी, सामाजिक कार्यकर्ता सुकमन कोर्राम, पुरुषोत्तम नाग, गोपी राम नाग, चमरा राम नाग ने इस घटना को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लाए गए धर्म स्वतंत्रता विधेयक और समाज में बढ़ती धार्मिक जागरूकता का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अब लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति पहले की तुलना में अधिक सजग हो रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दूर-दराज के इलाकों में लंबे समय से बाहरी तत्वों द्वारा प्रार्थना सभाओं और चंगाई कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है. ऐसे में समाज के भीतर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है.

नारायणपुर जिले में धर्मांतरण बना गंभीर सामाजिक मुद्दा

नारायणपुर जिले सहित अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय से धर्मांतरण की बहस और सामाजिक तनाव का केंद्र बना हुआ है. यदि इस समस्या की जड़ों को देखा जाए तो अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, बेहतर उपचार व्यवस्था का अभाव और सामाजिक-धार्मिक जागरूकता की कमी प्रमुख कारणों के रूप में सामने आते हैं. जिले के कई दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की गति बेहद धीमी है. स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा आज भी कई गांवों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पाई हैं. इसी का लाभ उठाकर बाहरी लोग ग्रामीणों और जनजातीय समुदायों के बीच धार्मिक प्रचार-प्रसार करते हैं

बस्तर संभाग हेड

अर्जुन देवांगन

9424287527

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