अर्जुन देवांगन क़ि रिपोर्ट : पेट्रोल-डीजल एवं रसोई गैस की दरों में की गई तेज और भारी वृद्धि की कड़ा विरोध करते हैं-फूलसिंग कचलाम
Ten Singh Thakur
Tue, May 19, 2026
COMMUNIST PARTY OF INDIA
Chhattisgarh State -फूलसिंग कचलाम
हम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी — छत्तीसगढ़ राज्य परिषद, केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की दरों में की गई तेज और भारी वृद्धि की कड़ा विरोध करते हैं।
पिछले कुछ महीनों में खाद्य और रोजमर्रा की आवश्यकताओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से प्रदेशवासियों की जीवन-यापन की लागत पहले से ही बढ़ चुकी है। ऐसे में ईंधन व गैस की मौजूदा वृद्धि सामाजिक व आर्थिक तौर पर और अधिक दबाव लेकर आई है।
देश में बेरोजगारी बढ़ रही है और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ चुकी है; इसके प्रभाव से अनेक लोग अपनी आजीविका गंवा रहे हैं। लघु एवं मध्यम उद्योग पहले ही संकट में हैं, और मजदूरों के वेतन महंगाई के अनुरूप नहीं बढ़े हैं। साथ ही, सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण से आम लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएँ पहुँच से बाहर होती जा रही हैं।
हम यह भी सख़्ती से रोकते हैं कि प्राकृतिक संसाधनों और खनिजों पर कॉर्पोरेट नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। स्थानीय समुदायों और आदिवासी जनजातियों के स्पष्ट विरोध के बावजूद खदानों और महाधन योजनाओं को बड़े उद्यमों को सौंपा जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय लोगों की जमीन और आजीविका प्रभावित हो रही है, बल्कि बड़े पैमाने पर वन विनाश, पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण और जलवायु परिवर्तन के जोखिम भी बढ़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय अव्यवस्थाओं का दीर्घकालिक प्रभाव ग्राम्य अर्थव्यवस्था और जल स्रोतों पर बुरा असर डालेगा।
इन परिस्थितियों में ईंधन एवं गैस की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर कामकाजी वर्ग, किसान, लघु व्यवसाय और उपभोक्ताओं पर भारी बोझ डालती है। यह वृद्धि आम जनता के हित के खिलाफ है और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है।
इसलिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी — छत्तीसगढ़ राज्य परिषद, केंद्र सरकार से मांग करती है कि वह तत्काल इन कीमतों की हालिया बढ़ोतरी को वापस ले और आवश्यक वस्तुओं, ईंधन व गैस पर वित्तीय राहत देने के ठोस कदम उठाए। साथ ही हम मांग करते हैं कि:
खनन एवं प्राकृतिक संसाधनों के वितरण की प्रक्रियाओं पर पुनर्विचार किया जाए; स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदायों की सहमति और हितों को प्राथमिकता दी जाए।
वनों की कटाई और पर्यावरणीय विनाश को रोका जाए; प्रभावी पर्यावरणीय मूल्यांकन और क्षतिपूर्ति तंत्र लागू किए जाएँ।
जलवायु परिवर्तन के जोखिम को ध्यान में रखते हुए विकास परियोजनाओं के विकल्प खोजे जाएँ और सतत, स्थानीय-लाभकारी विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए।
सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों के निजीकरण को रोका जाए और कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा जाल को मजबूत किया जाए।
हम छत्तीसगढ़ व देशभर के लोगों के साथ जुड़कर इन नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे और सरकार से उनके जीवन-स्तर की रक्षा के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक कदम उठाने की मांग करते हैं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी — छत्तीसगढ़ राज्य परिषद
बस्तर संभाग हेड
अर्जुन देवांगन
9424287527
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