: विश्व हिन्दू परिषद ने अबूझमाड़िया, आदिवासी बहन बेटियों तथा जनजातीय संस्कृति की रक्षा हेतु सौंपा ज्ञापन
Ten Singh Thakur
Fri, Aug 1, 2025
तेन सिंह ठाकुर
विश्व हिन्दू परिषद ने अबूझमाड़िया, आदिवासी बहन बेटियों तथा जनजातीय संस्कृति की रक्षा हेतु सौंपा ज्ञापन
नारायणपुर_जिले में मतांतरण (धर्मांतरण) की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अबूझमाड़िया जनजाति समाज की संस्कृति परंपरा और पहचान की रक्षा के लिए आज विश्व हिन्दू परिषद ने माननीय राज्यपाल के नाम से तथा कलेक्टर नारायणपुर को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि आदिवासी समाज के लोगों के संस्कृति परंपरा को संरक्षण देना चाहिए। अंदरूनी क्षेत्र में कुछ विशेष वर्ग के बाहरी लोगों की बढ़ती दखल से यहां की संस्कृति समाप्त हो जायेगी जिसके लिए अबूझमाड़ पूरी दुनिया में जाना जाता है। भारत देश में खनिज संपदा और अपनी विशेष संस्कृति परंपरा और पहचान के कारण ही अबूझमाड़ की पहचान है। आज हमारे बच्चे देश विदेश में जाकर अपनी संस्कृति और प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ज्ञापन में मुख्य रूप से अबूझमाड़िया जनजाति समाज जो कि भारत के राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाते हैं। जिनके संरक्षण हेतु यह संपूर्ण संभाग पांचवीं अनुसूची क्षेत्र घोषित है। परिषद के स्थानीय लोगों के अनुसार ये विषय सोचने वाली बात है कि, ऐसे क्षेत्र के लोग और युवक युवतियों को ठीक से हिन्दी भाषा बोलने में कठिनाई होती है और वे ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं होते ऐसे में ये बाहरी मिशनरियों के एजेंट आदिवासियों को बड़े ही आसानी से बीमारी से बचाव करने का बहाना बना कर भोले_भले आदिवासियों का धर्मांतरण/मतांतरण करा कर काम दिलाने का लालच देकर और बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाते हैं। जबकि शहरों में ही काफी बेरोजगार हैं तो फिर उत्तर प्रदेश से दो ईसाई समुदाय के महिलाओं और उनका एजेंट जो कि दुर्ग तक लड़कियों को पहुंचाने का काम कर रहा था उनके द्वारा हमारे इन भोले भाले आदिवासी भाई बहनों को इन विभिन्न प्रकार के अपराध देह व्यापार और अन्य गतिविधियों और विदेश में मानव तस्करी किया जा सकता है। इतने वर्षों से इस प्रकार के कार्य होना वो भी घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में! नक्सलियों और इन मतांतरण करने वालों का ये रिश्ता क्या कहलाता है। नक्सलियों के द्वारा कभी इनके एजेंटो को किसी तरह से परेशान नहीं किया जाना कहीं ना कहीं किसी बड़े नेटवर्क या सिंडिकेट का नाम या विदेशी साजिश होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए कि जिले के कितने लड़के लड़कियां अन्य प्रदेशों अथवा देशों में जाकर काम कर रहे हैं और उनकी वर्तमान में उनकी क्या स्थिति है साथ ही अबूझमाड़ क्षेत्र सहित जिले में आने वाले बाहर देश एवं प्रदेश के लोगों और धर्मांतरण कराने का काम करने और आदिवासी महिलाओं/युवक युवतियों को बाहर ले जाने वाले ऐसे लोगों को चिन्हित करके कार्यवाही भी किया जाये। आज ही आदिवासी समाज के लोगों के द्वारा विभिन्न स्त्रोत के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हो रही है की अबूझमाड़ के दुरस्त ग्राम पंचायत -कुतुल, पदमकोट के आश्रित ग्रामीण क्षेत्र में नारायणपुर जिले के अंतिम छोर एवं महाराष्ट्र राज्य से भी सीमावर्ती क्षेत्र के मिशनरियों के द्वारा इन क्षेत्रों में घूम घूम कर एवं सभाओ का आयोजन कर बहुत ही तेजी से ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार जोर शोर से किये जाने की जानकारी मिल रही है जो की मूल समाज के भविष्य के लिए अपने अस्तित्व के लिए खतरे का घंटी है। आखिर एक अशिक्षित या कम शिक्षित युवक युवती को नौकरी दिलाने का लालच देकर अन्य राज्य ले जाना तथा उसे उनके पूर्वजों के संस्कृति से दूर करना भी अपराध ही है जो कि साजिश के तहत यहां की संस्कृति को खत्म करना चाहते हैं।
*इस पर नारायणपुर के कूकड़ाझोर की निवासी कमलेश्वरी कहना है कि, मैंने ओरछा में अपनी कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई की है और अपनी पढ़ाई वर्ष 2019 में ही छोड़ चुकी थी उसे हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी, गणित, विज्ञान आदि अन्य विषयों का ज्ञान नहीं है। इसलिए पढ़ाई नहीं करती लेकिन उनके गांव में आने वाले कुछ मतांतरित व्यक्ति के कहना था कि, ईसाई समुदाय में आने से उसको नर्स की नौकरी लगा दी जाएगी आगे पढ़ने का खर्च भी उठाएंगे, इस तरह से कमलेश्वरी ने बात कही।
प्रधान सम्पादक
तेन सिंह ठाकुर
6264046084
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नारायणपुर_जिले में मतांतरण (धर्मांतरण) की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अबूझमाड़िया जनजाति समाज की संस्कृति परंपरा और पहचान की रक्षा के लिए आज विश्व हिन्दू परिषद ने माननीय राज्यपाल के नाम से तथा कलेक्टर नारायणपुर को ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि आदिवासी समाज के लोगों के संस्कृति परंपरा को संरक्षण देना चाहिए। अंदरूनी क्षेत्र में कुछ विशेष वर्ग के बाहरी लोगों की बढ़ती दखल से यहां की संस्कृति समाप्त हो जायेगी जिसके लिए अबूझमाड़ पूरी दुनिया में जाना जाता है। भारत देश में खनिज संपदा और अपनी विशेष संस्कृति परंपरा और पहचान के कारण ही अबूझमाड़ की पहचान है। आज हमारे बच्चे देश विदेश में जाकर अपनी संस्कृति और प्रतिभा का लोहा मनवाया है। ज्ञापन में मुख्य रूप से अबूझमाड़िया जनजाति समाज जो कि भारत के राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाते हैं। जिनके संरक्षण हेतु यह संपूर्ण संभाग पांचवीं अनुसूची क्षेत्र घोषित है। परिषद के स्थानीय लोगों के अनुसार ये विषय सोचने वाली बात है कि, ऐसे क्षेत्र के लोग और युवक युवतियों को ठीक से हिन्दी भाषा बोलने में कठिनाई होती है और वे ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं होते ऐसे में ये बाहरी मिशनरियों के एजेंट आदिवासियों को बड़े ही आसानी से बीमारी से बचाव करने का बहाना बना कर भोले_भले आदिवासियों का धर्मांतरण/मतांतरण करा कर काम दिलाने का लालच देकर और बहला फुसलाकर अपने साथ ले जाते हैं। जबकि शहरों में ही काफी बेरोजगार हैं तो फिर उत्तर प्रदेश से दो ईसाई समुदाय के महिलाओं और उनका एजेंट जो कि दुर्ग तक लड़कियों को पहुंचाने का काम कर रहा था उनके द्वारा हमारे इन भोले भाले आदिवासी भाई बहनों को इन विभिन्न प्रकार के अपराध देह व्यापार और अन्य गतिविधियों और विदेश में मानव तस्करी किया जा सकता है। इतने वर्षों से इस प्रकार के कार्य होना वो भी घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में! नक्सलियों और इन मतांतरण करने वालों का ये रिश्ता क्या कहलाता है। नक्सलियों के द्वारा कभी इनके एजेंटो को किसी तरह से परेशान नहीं किया जाना कहीं ना कहीं किसी बड़े नेटवर्क या सिंडिकेट का नाम या विदेशी साजिश होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए कि जिले के कितने लड़के लड़कियां अन्य प्रदेशों अथवा देशों में जाकर काम कर रहे हैं और उनकी वर्तमान में उनकी क्या स्थिति है साथ ही अबूझमाड़ क्षेत्र सहित जिले में आने वाले बाहर देश एवं प्रदेश के लोगों और धर्मांतरण कराने का काम करने और आदिवासी महिलाओं/युवक युवतियों को बाहर ले जाने वाले ऐसे लोगों को चिन्हित करके कार्यवाही भी किया जाये। आज ही आदिवासी समाज के लोगों के द्वारा विभिन्न स्त्रोत के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हो रही है की अबूझमाड़ के दुरस्त ग्राम पंचायत -कुतुल, पदमकोट के आश्रित ग्रामीण क्षेत्र में नारायणपुर जिले के अंतिम छोर एवं महाराष्ट्र राज्य से भी सीमावर्ती क्षेत्र के मिशनरियों के द्वारा इन क्षेत्रों में घूम घूम कर एवं सभाओ का आयोजन कर बहुत ही तेजी से ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार जोर शोर से किये जाने की जानकारी मिल रही है जो की मूल समाज के भविष्य के लिए अपने अस्तित्व के लिए खतरे का घंटी है। आखिर एक अशिक्षित या कम शिक्षित युवक युवती को नौकरी दिलाने का लालच देकर अन्य राज्य ले जाना तथा उसे उनके पूर्वजों के संस्कृति से दूर करना भी अपराध ही है जो कि साजिश के तहत यहां की संस्कृति को खत्म करना चाहते हैं।
*इस पर नारायणपुर के कूकड़ाझोर की निवासी कमलेश्वरी कहना है कि, मैंने ओरछा में अपनी कक्षा 10वीं तक की पढ़ाई की है और अपनी पढ़ाई वर्ष 2019 में ही छोड़ चुकी थी उसे हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी, गणित, विज्ञान आदि अन्य विषयों का ज्ञान नहीं है। इसलिए पढ़ाई नहीं करती लेकिन उनके गांव में आने वाले कुछ मतांतरित व्यक्ति के कहना था कि, ईसाई समुदाय में आने से उसको नर्स की नौकरी लगा दी जाएगी आगे पढ़ने का खर्च भी उठाएंगे, इस तरह से कमलेश्वरी ने बात कही।
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