: संगीता कीचेहरे पर लौटी मुस्कान: पोषण से बदलती ज़िंदगी
Ten Singh Thakur
Wed, Sep 24, 2025
सुनील सिंह की रिपोर्ट नारायणपुर
संगीता कीचेहरे पर लौटी मुस्कान: पोषण से बदलती ज़िंदगी
जिले के ग्राम गढ़बेंगाल में रहने वाली श्रीमती संगीता मानिकपुरी, एक साधारण ग्रामीण महिला, अपने जीवन में कठिन दौर से गुजर रही थी। उनका पहला बच्चा कमजोर और कुपोषण का शिकार था। खून की कमी (एनीमिया) के कारण वह दूसरी बार गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, इसलिए बाज़ार से महंगे पोषक आहार लेना संभव नहीं था।
इसी बीच गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 01 की कार्यकर्ता ने संगीता का हाल जाना। उन्होंने संगीता को समझाया कि सही खानपान और छोटे-छोटे घरेलू उपायों से भी स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। कार्यकर्ता ने उन्हें प्रतिदिन मिलने वाले रेडी-टू-ईट आहार को अलग-अलग तरीकों से पकाकर खाने की सलाह दी। साथ ही, नियमित रूप से आयरन की गोलियां लेने और हरी सब्जियों, विशेषकर मूंगा भाजी को उबालकर उसका पानी पीने की आदत डलवाई। संगीता ने इन बातों को गंभीरता से अपनाया। धीरे-धीरे उनके शरीर में बदलाव नज़र आने लगा। उनका स्वास्थ्य बेहतर होने लगा और कमजोरी दूर हो गई। समय बीतते ही संगीता फिर से स्वस्थ हुईं और आखिरकार उन्होंने दूसरा गर्भधारण किया। 01 अगस्त 2025 को संगीता ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। आज संगीता और उनका शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। सही मार्गदर्शन, पोषण और नियमित देखभाल किसी भी महिला का जीवन बदल सकता है। संगीता की मुस्कान अब गाँव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
संवाददाता
सुनील सिंह
9407928568
प्रधान संपादक
तेन सिंह ठाकुर
6264046084
संगीता कीचेहरे पर लौटी मुस्कान: पोषण से बदलती ज़िंदगी
जिले के ग्राम गढ़बेंगाल में रहने वाली श्रीमती संगीता मानिकपुरी, एक साधारण ग्रामीण महिला, अपने जीवन में कठिन दौर से गुजर रही थी। उनका पहला बच्चा कमजोर और कुपोषण का शिकार था। खून की कमी (एनीमिया) के कारण वह दूसरी बार गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, इसलिए बाज़ार से महंगे पोषक आहार लेना संभव नहीं था।
इसी बीच गाँव के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 01 की कार्यकर्ता ने संगीता का हाल जाना। उन्होंने संगीता को समझाया कि सही खानपान और छोटे-छोटे घरेलू उपायों से भी स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। कार्यकर्ता ने उन्हें प्रतिदिन मिलने वाले रेडी-टू-ईट आहार को अलग-अलग तरीकों से पकाकर खाने की सलाह दी। साथ ही, नियमित रूप से आयरन की गोलियां लेने और हरी सब्जियों, विशेषकर मूंगा भाजी को उबालकर उसका पानी पीने की आदत डलवाई। संगीता ने इन बातों को गंभीरता से अपनाया। धीरे-धीरे उनके शरीर में बदलाव नज़र आने लगा। उनका स्वास्थ्य बेहतर होने लगा और कमजोरी दूर हो गई। समय बीतते ही संगीता फिर से स्वस्थ हुईं और आखिरकार उन्होंने दूसरा गर्भधारण किया। 01 अगस्त 2025 को संगीता ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। आज संगीता और उनका शिशु दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। सही मार्गदर्शन, पोषण और नियमित देखभाल किसी भी महिला का जीवन बदल सकता है। संगीता की मुस्कान अब गाँव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
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