Thu 18 Jun 2026

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: “लखपति दीदी” कार्यशाला में गूंजा राष्ट्रीय संवाद, दंतेवाड़ा की निकिता मरकाम बनीं प्रेरणा की मिसाल

  तेन सिंह ठाकुर “लखपति दीदी” कार्यशाला में गूंजा राष्ट्रीय संवाद, दंतेवाड़ा की निकिता मरकाम बनीं प्रेरणा की मिसाल
रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय लखपति दीदी क्षेत्रीय कार्यशाला का समापन उत्साह और उम्मीदों के साथ हुआ। इस कार्यशाला में ग्रामीण भारत में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों, रणनीतियों और सफलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। भारत सरकार और विभिन्न राज्यों के ग्रामीण आजीविका मिशन की यह अभूतपूर्व पहल देश भर में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। कार्यशाला में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव श्री एससीएल दास शामिल हुए। वहीं रायपुर में भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव श्री टीके अनिल, छत्तीसगढ़ शासन की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाती शर्मा, सचिव श्री भीम सिंह और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की संचालक श्रीमती जयश्री जैन की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। देश के 11 राज्यों से मिशन संचालक आजीविका विशेषज्ञ और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी इस संवाद का हिस्सा बनीं। कार्यशाला में लखपति दीदी कार्यक्रम के तहत चल रही पहलों, नवाचारों और सफलता की कहानियों को साझा किया गया। चर्चा का केंद्र बिंदु यह रहा कि कैसे ग्रामीण महिलाओं को एक सशक्त उद्यमी के रूप में विकसित किया जा सकता है, ताकि वे न केवल आत्मनिर्भर बनें, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरक बनें। कार्यशाला के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ की 10 लखपति दीदियों ने मंच पर आकर अपनी यात्रा साझा की। इनमें दंतेवाड़ा जिले की निकिता मरकाम दीदी की कहानी विशेष रूप से सबका ध्यान आकर्षित कर गई। निकिता ने बताया कि कैसे उन्होंने बिहान योजना से जुड़कर अपने जीवन को बदला। शुरुआत में उन्होंने एक छोटी किराना दुकान खोली और सब्जी उत्पादन शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने आम और जामुन का व्यवसाय भी शुरू किया। इस वर्ष केवल सब्जियों से उन्हें दो लाख रुपए और आम-जामुन से एक लाख रुपए की आमदनी हुई है। इसके अलावा वह डीसी किराना दुकान, सिलाई सेंटर और वेल्डिंग की दुकान का संचालन भी खुद कर रही हैं। अब उनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपए से अधिक हो चुकी है। आत्मविश्वास से भरी निकिता कहती हैं, “अब मेरा सपना करोड़पति दीदी बनने का है।”इस कार्यशाला ने यह साबित कर दिया कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिले तो वे किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं। दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्र जो कभी संघर्ष और चुनौतियों के लिए जाने जाते थे, अब महिला उद्यमिता के केंद्र बनते जा रहे हैं। लखपति दीदी सिर्फ एक आर्थिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आत्मबल, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का उत्सव बन चुका है। रायपुर में आयोजित यह कार्यशाला इसी यात्रा का सशक्त उदाहरण है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर महिला शक्ति की गूंज को और भी प्रखर कर दिया है। प्रधान सम्पादक तेन सिंह ठाकुर 6264046084

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