: बारसूर के हितालकुदुम में केंद्र व राज्य की महत्वाकांक्षी योजना बोधघाट परियोजना के निर्माण को लेकर ग्रामीणों की बैठक ।
Ten Singh Thakur
Sun, Jun 22, 2025
रचना ठाकुर कि रिपोर्ट...
बारसूर के हितालकुदुम में केंद्र व राज्य की महत्वाकांक्षी योजना बोधघाट परियोजना के निर्माण को लेकर ग्रामीणों की बैठक ।
दंतेवाड़ा ।दंतेवाड़ा जिले के बारसूर सातधार में बनने वाली बहुउद्देशीय बोधघाट विद्युत व सिंचाई परियोजना के निर्माण कार्य को रोकने के लिए रविवार को बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा बस्तर, कोंडागांव, बीजापुर सहित नारायणपुर के 56 गांव के ग्रामीण परिचर्चा के लिए बैठक बुलाया जिसमें सैकड़ो की संख्या में पहुँचे हैं. और बोधघाट परियोजना संघर्ष समिति की अगुवाई में इन गांव के पंच सरपंचों व ग्रामीणों ने निर्माण कार्य को कैसे और किस प्रकार से रोकने लगाने की एक रणनीति भी बनाई , और शासन - प्रशासन से मीडिया के माध्यम से रोक की गुहार लगाई है. संघर्ष समिति के युवा अध्यक्ष शिव कुमार मडावी का कहना है कि 43 से 44 साल बाद बीजेपी के केंद्र और राज्य सरकार फिर परियोजना को शुरू का बात कह रही है लेकिन इसको निर्माण करने का कोई औचित्य नहीं है. 20 से भी अधिक ग्राम पंचायतों के 56 गांव प्रभावित हो रहे हैं. उन गांव की जमीन बेहद उपजाऊ है, समिति के अध्यक्ष ने देवी देवताओं के नाराज होने की बात भी कही साथ ही हम इसी जंगल में कंद- मूल , महुआ टोरा फूटु जैसी सब्जियां व औषधियां प्राप्त कर अपनी जीवन चलाते हैं। इसीलिए हम कहते हैं कि अपनी जान देंगे लेकिन बोधघाट परियोजना के लिए जल जंगल ज़मीन नहीं देने की बात कही।
वहीं पूर्व संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुकमन कश्यप ने कहा कि 40 साल पहले भी 1979 में केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार द्वारा बोधघाट परियोजना शुरू करने की कोशिश की गई थी. लेकिन तब भी ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था और आज भी प्रदेश में बीजेपी सरकार बनी है, ऐसे में ग्रामीण नहीं चाहते हैं कि फिर से बोधघाट परियोजना का काम शुरू हो. आज ग्रामीणों से चर्चा के बाद का कहना है कि इस परियोजना के शुरू होने से उनका जल, जंगल, जमीन सब कुछ खत्म हो जाएगी. साथ ही पुरखों के जमीन और घर इस परियोजना में बर्बाद हो जाएंगे.
ग्रामीणों ने आज के बैठक में बोधघाट परियोजना का पुरजोर विरोध किया है, बोधघाट परियोजना संघर्ष समिति व ग्रामीणों का साथ खुले तौर पर सर्व आदिवासी समाज से जुड़े सलाहकारों ने भी अपना समर्थन दिया है.
साथ ही अगर वर्तमान बीजेपी सरकार नहीं मानेगी तो राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम पर सभी अलग- अलग जिला के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे । और किसी भी हालत में बोधघाट परियोजना बनने नहीं देंगे।
जिला ब्यूरो प्रमुख दंतेवाड़ा
रचना ठाकुर
7000297169
दंतेवाड़ा ।दंतेवाड़ा जिले के बारसूर सातधार में बनने वाली बहुउद्देशीय बोधघाट विद्युत व सिंचाई परियोजना के निर्माण कार्य को रोकने के लिए रविवार को बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा बस्तर, कोंडागांव, बीजापुर सहित नारायणपुर के 56 गांव के ग्रामीण परिचर्चा के लिए बैठक बुलाया जिसमें सैकड़ो की संख्या में पहुँचे हैं. और बोधघाट परियोजना संघर्ष समिति की अगुवाई में इन गांव के पंच सरपंचों व ग्रामीणों ने निर्माण कार्य को कैसे और किस प्रकार से रोकने लगाने की एक रणनीति भी बनाई , और शासन - प्रशासन से मीडिया के माध्यम से रोक की गुहार लगाई है. संघर्ष समिति के युवा अध्यक्ष शिव कुमार मडावी का कहना है कि 43 से 44 साल बाद बीजेपी के केंद्र और राज्य सरकार फिर परियोजना को शुरू का बात कह रही है लेकिन इसको निर्माण करने का कोई औचित्य नहीं है. 20 से भी अधिक ग्राम पंचायतों के 56 गांव प्रभावित हो रहे हैं. उन गांव की जमीन बेहद उपजाऊ है, समिति के अध्यक्ष ने देवी देवताओं के नाराज होने की बात भी कही साथ ही हम इसी जंगल में कंद- मूल , महुआ टोरा फूटु जैसी सब्जियां व औषधियां प्राप्त कर अपनी जीवन चलाते हैं। इसीलिए हम कहते हैं कि अपनी जान देंगे लेकिन बोधघाट परियोजना के लिए जल जंगल ज़मीन नहीं देने की बात कही।
वहीं पूर्व संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुकमन कश्यप ने कहा कि 40 साल पहले भी 1979 में केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार द्वारा बोधघाट परियोजना शुरू करने की कोशिश की गई थी. लेकिन तब भी ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था और आज भी प्रदेश में बीजेपी सरकार बनी है, ऐसे में ग्रामीण नहीं चाहते हैं कि फिर से बोधघाट परियोजना का काम शुरू हो. आज ग्रामीणों से चर्चा के बाद का कहना है कि इस परियोजना के शुरू होने से उनका जल, जंगल, जमीन सब कुछ खत्म हो जाएगी. साथ ही पुरखों के जमीन और घर इस परियोजना में बर्बाद हो जाएंगे.
ग्रामीणों ने आज के बैठक में बोधघाट परियोजना का पुरजोर विरोध किया है, बोधघाट परियोजना संघर्ष समिति व ग्रामीणों का साथ खुले तौर पर सर्व आदिवासी समाज से जुड़े सलाहकारों ने भी अपना समर्थन दिया है.
साथ ही अगर वर्तमान बीजेपी सरकार नहीं मानेगी तो राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम पर सभी अलग- अलग जिला के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे । और किसी भी हालत में बोधघाट परियोजना बनने नहीं देंगे।
जिला ब्यूरो प्रमुख दंतेवाड़ा
रचना ठाकुर
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