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तेन सिंह ठाकुर की रिपोर्ट : सीपीआई, सीसीएम सदस्य खूंखार माओवादी गणेश यूईके ढेर उड़ीसा पुलिस की मिली बड़ी सफलता,

ओडिशा में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता, वरिष्ठ माओवादी नेता गणेश उइके ढेर ओडिशा में माओवादी विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी परिचालन सफलता मिली है*

छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल और गंजाम जिलों के सीमावर्ती वन क्षेत्रों में संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए अभियान में प्रतिबंधित CPI (माओवादी) संगठन के एक वरिष्ठ नेता सहित चार माओवादी कैडरों को निष्क्रिय कर दिया गया है। प्राप्त विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर एलडब्ल्यूई-प्रभावित रम्भा वन क्षेत्र में यह अभियान शुरू किया गया था। यह इलाका लंबे समय से माओवादियों की आवाजाही, पुनर्गठन और रसद आपूर्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता रहा है। 25 दिसंबर 2025 की तड़के सुरक्षा बलों और माओवादी कैडरों के बीच वन क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों पर कई बार मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद सुरक्षा बलों ने सघन सर्च और एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन चलाया। तलाशी के दौरान दो महिला कैडरों सहित कुल चार माओवादियों के शव बरामद किए गए। मौके से हथियार और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी जब्त किया गया।मारे गए माओवादियों में से एक की पहचान गणेश उइके के रूप में हुई है, जो CPI (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और ओडिशा स्टेट कमेटी का प्रभारी था। करीब 69 वर्षीय गणेश उइके रूपा, राजेश तिवारी, चम्रू, पक्का हनुमंतु, गणेशन्ना और सोमारू जैसे कई उपनामों से भी जाना जाता था। वह तेलंगाना के नलगोंडा जिले के चेंदुर मंडल स्थित पुल्लेमाला गांव का निवासी था। गणेश उइके वर्ष 1988 से दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय था और माओवादी संगठन का एक प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। उसने जगदलपुर में सिटी ऑर्गनाइज़र, वेस्ट बस्तर डिवीजनल कमेटी के सचिव तथा दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिलों में कुल 16 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।

वर्ष 2014 में सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र अंतर्गत तहकवाड़ा में पुलिस दल पर हुए सशस्त्र हमले में 15 जवानों की शहादत के मामले में भी उसकी संलिप्तता रही है। उसके आपराधिक रिकॉर्ड में नागरिकों की हत्या, अपहरण, पुलिस बलों पर हमले तथा हथियारों और विस्फोटकों का अवैध उपयोग शामिल है। शेष तीन मारे गए माओवादी कैडरों की पहचान ओडिशा पुलिस द्वारा की जा रही है।

इस संबंध में बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि गणेश उइके की निष्क्रियता ओडिशा की माओवादी नेतृत्व संरचना के लिए एक बड़ा झटका है। इससे न केवल ओडिशा बल्कि छत्तीसगढ़ और अन्य पड़ोसी राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क की कमान, नियंत्रण और समन्वय क्षमता गंभीर रूप से कमजोर होगी।

उन्होंने कहा कि यह सफलता सुरक्षा बलों की खुफिया-आधारित और समन्वित कार्रवाई की प्रभावशीलता को दर्शाती है तथा वामपंथी उग्रवाद के समूल उन्मूलन के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। आईजी ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में शेष बचे माओवादी कैडरों के पास हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं बचा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ प्रदेश में पहले से कमजोर पड़ रहे नक्सल संगठन को और गहरा झटका लगा है। दंडकारण्य क्षेत्र में लगातार हो रही सफल कार्रवाइयाँ यह संकेत दे रही हैं कि माओवादी विचारधारा अपने अंतिम चरण में है।

यह ऑपरेशन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय किए गए उस लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिसके तहत वर्ष 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लिया गया है। इस बड़ी सफलता से छत्तीसगढ़, ओडिशा समेत सभी पड़ोसी राज्यों में शांति, विकास और विश्वास का माहौल और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रधान संपादक

तेन सिंह ठाकुर

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