जिला नारायणपुर की जर्जर सडक और माइनिंग खदानों के खुलने से बनी जिले वासियो के मुसीबतों का कारण*
जिला नारायणपुर में आज जर्जर सडक और माइनिंग में चलने वाले हजारों ट्रक और टिप्पर बनी आम जनता के जीवन को अस्त व्यस्त और जीवन यापन करने में सबसे बड़ी समस्या बन गई हैं, मानो कि जिला नारायणपुर का विकास नहीं विनाश हो रहा हैं, माइनिंग क़ि खदाने खुलने से पहले न तो पहले रोड का निर्माण करवाया गया और न ही आम जनता कि होनें वाली समस्याओ के बारे में किसी ने नहीं सोचा, जनप्रतिनिधि से लेकर शसान प्रशासन इस विकराल समस्या से अनभिज्ञ नहीं हैं, सब कुछ जानते हुये भी चुप्पी साधे हुये हैं, बार बार आम जनता त्रस्त होकर रोड में उतर कर हड़ताल करने बैठे जाने पर भी सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिलता, आम जनता करें तो क्या करें समस्या ज्यादा हैं समाधान करने वाले का अता पता नहीं, सिर्फ चुनाव के समय आम जनता के आगे पीछे घूमते रहते हैं। और बडे बडे वादे करते रहते हैं, कि हमारी सरकार आने के बाद हम ये कर देंगे वो कर देंगे, और चुनाव समापन के बाद जो पार्टी विजय होकर आती हैं, दुबारा आम जनता के पास झाकने भी नहीं जाते, यही कड़वी सच्चाई हैं, हमारे देश कि जनता भोली भाली हैं,मीठे मीठे वादों में फस जाती हैं, और अगले 5 साल तक सहन करने को मजबूर रहते हैं, करें भी तो क्या हमारे देश में भर्ष्टाचार रुकने का तो नाम ही नहीं लेता।
आमदई खदान खुले 5 साल होनें को जा रहा हैं और रावघाट खदान खुले 4 साल होनें को जा रहा हैं, पर रोड कि स्तिथि दिन ब दिन और बत्तर होती जा रही हैं, पिछले 10 महीनों से तो यात्री बस सेवा न के बराबर ही चल रही हैं, आम जनता अपना दुखड़ा आख़िरकार किसके पास जाकर सुनाये, शासन हो या प्रशासन या फिर जनप्रतिनिधि इनके पास जाने से सिर्फ आश्वासन के अलावा और भी कुछ भी नहीं मिलता।
*ट्रक और टिप्पर मालिक भी हैं ख़राब सडक से परेशान*
ट्रक और टिप्पर मालिकों ने सपने में भी कभी नहीं सोचा था क़ि नारायणपुर जिला में माइनिंग खदान के खुलने से जीना खाना हराम जायेगा, ख़राब रोड के कारण न तो ट्रक टिप्पर डंग से चल पा रहा हैं, न गाड़ी मालिक खड़ा रख पा रहे हैं, क्योंकि लोन क़ि किस्तों का मीटर चालू हैं, जो क़ि ट्रक ख़राब होने क़ि स्तिथि में या एक्सीडेंट हो, ड्राइवर हो या न हो गाड़ी चले या न चले किस्त तो पटाना ही पड़ेगा। खदान खुलने से पहले आम जनता को कंपनी के द्वारा बडे बडे वादे किये गये थे, पर जमीनी स्तर पर कंपनी का वादा जीरो हैं, कोई भी सुविधा आम जनता को मुहैया नहीं करवा पाई हैं ।DMF फंड का पैसा का अता न पता कहाँ पर आता हैं, और कहाँ पर जाता हैं, करोडो रुपये कंपनी के द्वारा खर्चो में कागजो में दिखाती हैं, पर आम जनता को शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर आम जनता को छलावा के अलावा कुछ भी नहीं मिल पा रहा हैं। जिला नारायणपुर के सभी गाड़ी मालिक मज़बूरी में ही गाड़ी चला रहे हैं, कई गाड़ी मालिकों का तो हालत इतना ख़राब हो चूका हैं कि गाड़ी कि किस्तें पटाते पटाते सोना चांदी जमीन जायजाद सब बिक गया हैं, या गिरवी में हैं, जिन जिन गाड़ी मालिकों के पास कोई आवक का दूसरा स्रोत इनकम का नहीं हैं, वो गाड़ी मालिक तो पूरी तरह बर्बाद होनें क़ि कगार पर पहुंच गये हैं। या तो गाड़ी बेचने के लिये ग्राहक ढूंढ रहे हैं, या फिर किस्त नहीं पटाने पर फायनेसर के द्वारा लोन किस्तों का दबाव दिया जाता हैं, या गाड़ियों को खींच कर ले जा रहे हैं। इन सभी समस्याओ का जिम्मेदार आखिर कौन हैं।
*माइनिंग खदानों के खुलने से सिर्फ सरकार को और बड़ी माइनिंग कंपनी को ही फायदा हुआ हैं*
खदानों के खुलने से सिर्फ सरकार को सालाना रायल्टी के रूप में अरबो खरबों रुपये मिल रहे हैं और कंपनी को अरबो खरबों रुपये कमा रही हैं,इसके अलावा आम जनता और जिले वासियो को धूल मिट्टी के गुब्बारे, स्वांस कि बीमारी, एक्सीडेंट में अपनों को खोना, जंगल पहाड़ धीरे धीरे समाप्त होते जायेंगे और इंसान भी बीमारी के जकड़ो में आकर मरने को मजबूर हो जायेगा। वर्तमान में धीरे धीरे तापमान और बढ़ रहा हैं, गर्मी का ताप इतना बढ़ गया हैं कि न ही AC काम आ रहा हैं, और न कूलर पंखा ठंडक हवा दे पा रही हैं,सब मजबूर हैं, आम जनता करें तो क्या करें क्योंकि एक इंसान अपने फायदे के लिये पेड़ो को काटकर विकास कि बाते कर रहे हैं, वही दूसरी ओर प्रकिति के साथ छेड़छाड़ करके अपनी मौत के साथ दुसरो कि मौत को भी बुलावा दे रहे हैं,
आज ओरछा रोड की बदहाल स्थिति को लेकर आज ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। माइनिंग गाड़ियों के लगातार आवागमन से सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन सैकड़ों भारी वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, जिसके कारण धूल का गुबार पूरे क्षेत्र में फैल जाता है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सांस संबंधी समस्याएं हो रही हैं।
इसके साथ ही, ट्रकों की तेज रफ्तार भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। आए दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान भी जा चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इन्हीं समस्याओं को लेकर आज ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर सड़क पर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से तत्काल सड़क की मरम्मत, धूल नियंत्रण के उपाय और ओवरस्पीडिंग पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।
अब देखना होगा शासन प्रशासन और माइनिंग कंपनी आम जनता को क्या राहत पहुंचाती हैं, या हमेशा कि तरह वही घिसी पीटी कहानी गडकर कि रोड का काम चालू हैं, और जल्द ही रोड बन जायेगा करके पेचिंग के नाम पर खदानों से निकले अवशेषों को बडे बडे बोल्डर को रोड में बिछाने का काम करती हैं, जिससे गाड़ी मालिकों का टायर के ऊपर टायर प्रतिदिन और फुठते रहे और गाड़ी मालिक भी पूरी तरह से बर्बाद हो जाये और आम जनता को फिर से एक और आश्वासन देकर शांत करवाती हैं।
बस्तर संभाग हेड
अर्जुन देवांगन
9424287527