Wed 28 Oct 2026

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सह संपादक अर्जुन देवांगन : नारायणपुर: करोड़ों के CSR-DMF फंड पर उठे सवाल, ग्रामीण श्रमदान से बना रहे सड़क

नारायणपुर: करोड़ों के CSR-DMF फंड पर उठे सवाल, ग्रामीण श्रमदान से बना रहे सड़क

धनोरा-पेरमापाल में बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप, तीन वर्षों के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

नारायणपुर/छोटेडोंगर-ओरछा। नारायणपुर जिले के निको खनन क्षेत्र से प्रभावित ग्राम पंचायत धनोरा-पेरमापाल में ग्रामीणों द्वारा श्रमदान कर सड़क बनाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन प्रभावित गांवों के विकास के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और जिला खनिज न्यास (DMF) मद से राशि खर्च किए जाने के बावजूद उन्हें सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इसे लेकर ग्रामीणों ने पिछले तीन वर्षों में स्वीकृत विकास कार्यों और खर्च की गई राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने खुद संभाली सड़क बनाने की जिम्मेदारी

ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में खनन से जुड़े भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और उड़ती धूल से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को खुद श्रमदान कर रास्ता तैयार करने के लिए आगे आना पड़ रहा है। इस स्थिति ने खनन प्रभावित गांवों में विकास कार्यों और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी एवं ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए CSR और DMF के तहत राशि खर्च की जाती है, तो गांवों में सड़क जैसी जरूरी सुविधा के लिए लोगों को स्वयं श्रमदान क्यों करना पड़ रहा है।

सोलर लाइट बंद, सिलाई प्रशिक्षण केंद्र भी छह महीने से बंद होने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में लगाई गई कई सोलर स्ट्रीट लाइट रखरखाव के अभाव में बंद पड़ी हैं। वहीं, कौशल विकास के उद्देश्य से शुरू किया गया सिलाई प्रशिक्षण केंद्र भी पिछले छह महीने से बंद होने की बात कही गई है।

ग्रामीणों ने सड़क किनारे खुले में मल-मूत्र किए जाने, भारी वाहनों से धूल का गुबार उठने और कुछ वाहन चालकों द्वारा नशे की हालत में वाहन चलाने की शिकायत भी उठाई है। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों से आम लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने संबंधित व्यवस्थाओं की जांच और आवश्यक सुधार की मांग की है।

भारी वाहनों की पार्किंग से आवागमन प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार, खनन क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग से भी आवागमन में परेशानी होती है। उनका कहना है कि खनन गतिविधियों का असर झेलने के बावजूद स्थानीय लोगों को आवश्यक सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रही हैं।

जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में CSR और DMF की राशि का उपयोग स्थानीय लोगों की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ विकास कार्यों की जमीनी स्थिति की समीक्षा करने की मांग की है।

तीन वर्षों के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि पिछले तीन वर्षों में CSR और DMF मद से प्राप्त राशि, स्वीकृत परियोजनाओं, खर्च की गई रकम तथा पूर्ण और अधूरे निर्माण कार्यों का विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, गांववार जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किस कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितना खर्च किया गया और वर्तमान में उस कार्य की स्थिति क्या है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई और खर्च का हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

अब संबंधित विभागों के जवाब का इंतजार

धनोरा-पेरमापाल में ग्रामीणों द्वारा श्रमदान से सड़क बनाने की स्थिति ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्राथमिकता, गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े किए हैं। अब संबंधित विभागों और खनन प्रबंधन की ओर से ग्रामीणों के आरोपों पर आधिकारिक पक्ष तथा CSR-DMF मद के तहत किए गए खर्च का विवरण सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

सह संपादक: अर्जुन देवांगन

संपर्क: 9424287527

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