सह संपादक अर्जुन देवांगन : नारायणपुर: बस्तर में स्थायी शांति के लिए निर्दोष मूलवासियों की रिहाई जरूरी, झीरम मामले के 10 बंदियों को लेकर भी उठी मांग
Ten Singh Thakur
Tue, Oct 13, 2026
..नारायणपुर: बस्तर में स्थायी शांति के लिए निर्दोष मूलवासियों की रिहाई जरूरी, झीरम मामले के 10 बंदियों को लेकर भी उठी मांग
भारतीय किसान यूनियन ने उपमुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, शांति प्रक्रिया में जेलों में बंद मूलवासियों और आम ग्रामीणों को शामिल करने की अपील
नारायणपुर, 13 अक्टूबर 2026। बस्तर संभाग में स्थायी शांति स्थापित करने और संघर्ष से प्रभावित स्थानीय ग्रामीणों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) जिला नारायणपुर ने मंगलवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने नक्सल संघर्ष के दौरान जेलों में बंद निर्दोष मूलवासियों की रिहाई, झीरम घाटी मामले में बंद 10 व्यक्तियों के संबंध में कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत तथा शांति वार्ता में आम ग्रामीणों को शामिल करने की मांग उठाई।
भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि बस्तर में स्थायी शांति की पहल तभी सार्थक होगी, जब इसका लाभ संघर्ष से प्रभावित आम ग्रामीणों और उनके परिवारों तक पहुंचेगा। संगठन ने आरोप लगाया कि कई मूलवासी लंबे समय से गंभीर आरोपों में जेलों में बंद हैं, जिससे उनके परिवारों को सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने ऐसे मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर पात्र बंदियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत देने की मांग की।
ज्ञापन में रखीं पांच प्रमुख मांगें
1. निर्दोष मूलवासियों की रिहाई: यूनियन ने नक्सल उग्रवाद से जुड़े मामलों में जेलों में बंद उन मूलवासियों के प्रकरणों की समीक्षा करने की मांग की, जिनके विरुद्ध संगठन के अनुसार निराधार आरोप लगाए गए हैं। संगठन ने कहा कि पात्र व्यक्तियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जल्द राहत मिलनी चाहिए।
2. झीरम घाटी मामले के 10 बंदियों के संबंध में हस्तक्षेप: वर्ष 2013 के झीरम घाटी हमले से जुड़े मामले में जेल में बंद 10 व्यक्तियों को लेकर यूनियन ने अपनी मांग रखी। संगठन ने मृत्युदंड के संबंध में कानूनी प्रक्रिया की समीक्षा, आवश्यक कानूनी उपाय अपनाने और बंदियों को राहत देने की मांग की। यूनियन का कहना है कि बस्तर में शांति स्थापित करने के प्रयासों के साथ न्यायिक और मानवीय पहलुओं पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
3. शांति प्रक्रिया में बंद मूलवासियों को शामिल किया जाए: यूनियन ने मांग की कि सरकार और माओवादी पक्ष के बीच होने वाली शांति प्रक्रिया का दायरा व्यापक हो। इसमें केवल हथियार छोड़ने वालों तक सीमित रहने के बजाय जेलों में बंद उन मूलवासियों के मामलों पर भी विचार किया जाए, जो मुख्यधारा में लौटकर अपने परिवारों के साथ जीवन बिताना चाहते हैं।
4. अभियोजन वापसी की प्रक्रिया तेज हो: संगठन ने निर्दोष बंदियों के मामलों की समीक्षा और अभियोजन वापसी से संबंधित कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की। यूनियन के अनुसार, इसके लिए गठित समीक्षा समिति को प्रभावी ढंग से कार्य करना चाहिए, ताकि पात्र लोगों के मामलों का समयबद्ध निराकरण हो सके।
5. न्याय को शांति प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए: यूनियन ने कहा कि बस्तर में शांति की पहल का लाभ आम ग्रामीणों, आदिवासी परिवारों और लंबे समय से जेलों में बंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। संगठन ने सरकार से आग्रह किया कि स्थायी शांति के लिए न्याय, पुनर्वास और सामाजिक विश्वास को भी प्राथमिकता दी जाए।
ये पदाधिकारी रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही, संभाग अध्यक्ष शिवा स्वर्णकार, गरियाबंद जिला अध्यक्ष मदनलाल साहू, नारायणपुर जिला अध्यक्ष रुबजी सलाम और बस्तर जिला अध्यक्ष रमेश गोयल सहित नरसिंह मंडावी, सूरज कुमार नेताम, सोमजी सलाम, श्यामलाल दुग्गा तथा जेलों में बंद आदिवासियों के परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।
सरकार से तत्काल पहल करने की अपील
भारतीय किसान यूनियन ने सरकार से इस गंभीर मानवीय और न्यायिक विषय पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया। संगठन का कहना है कि बस्तर में विकास और स्थायी शांति का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब संघर्ष से प्रभावित ग्रामीणों को न्याय मिले और उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान हो।
यूनियन ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग की कि बंदियों के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा, कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी और शांति वार्ता में आम ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सह संपादक: अर्जुन देवांगन
CGFastNews24MPCG
संपर्क: 9424287527
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