Wed 28 Oct 2026

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बस्तर दशहरा का अनोखा रस्म बेल पूजा। : बस्तर महाराजा पूरे लाव लस्कर के साथ पहुंचे सरगीपाल , जोड़ा बेलवृक्ष की पूजा किया।

बस्तर दशहरा जो अपने आप में अनोखा है... यहां निभाई जाने वाली हर रस्मे बेहद ही खास होती हैं।

पर्व का प्रमुख बेल न्यौता रस्म आज पूरे विधि विधान के साथ पूरा किया गया... वंही..इस रस्म को पूरा करने बस्तर राज परिवार सदस्य गाजे बाजे और अपने पूरे लाव लश्कर के साथ सरगीपाल गांव पहुंचे।

बस्तरदशहरा के इस रस्म में जोड़ा बेलवृक्ष की।पूजा कर उसमें एक साथ लगने वाले जोड़ा बेल फलों को तोड़कर मां दंतेश्वरी मंदिर ले जाते हैं... इस विधान को बेल न्योता रस्म कहा जाता है।

वंही इस इकलौते जोड़ा बेलवृक्ष को बस्तर के लोग अनोखा और दुर्लभ मानते हैं... शहर से लगे ग्राम सरगीपाल में वर्षों पुराना एक बेलवृक्ष है... जिसमें जोड़ा बेल फल एक साथ लगते हैं. ..और इस जोड़ा बेल को देवी का रूप मानकर राज परिवार सदस्य द्वारा पूरे विधि विधान से पुजा अर्चना के बाद तोड़कर इसे पूरे सम्मान के साथ मां दंतेश्वरी मंदिर लाया जाता हैं..वंही इस बेल न्योता रस्म में बस्तर राज परिवार सदस्य कमलचंद भंजदेव सहित पर्व के प्रमुखों और, मांझी चालकी सदस्य व हजारों ग्रामीण शामिल होते हैं.. .. वंही बेल पूजा विधान की वास्तविकता के बारे में कहा जाता हैं कि दो कन्याओं के तौर पर बेल की पूजा की जाती हैं और उन्हें पर्व मे आशीर्वाद स्वरूप शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाता हैं... वंही इस रस्म से गांव में उत्सव जैसा माहौल रहता हैं ... और एक शादी की तरह रस्म में हल्दी खेली जाती हैं और ग्रामीण नाचते गाते हुए .. अपने घरों से निकलकर पूजा स्थल पहुंचते हैं..वंही बस्तर राज परिवार सदस्य कमलचंद ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही हैं और आज भी इस परंपरा का निर्वहन बस्तर के लोग करते आ रहे है.. साथ ही कहा कि यह पर्व आस्था का महापर्व है इसमें सभी समाज की भागीदारी पुर्व से ही सुनिश्चित की गई हैं।

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