सह संपादक अर्जुन देवांगन : 25 किलोमीटर के दुर्गम रास्ते पर ग्रामीणों ने खुद बनाई पगडंडी, कुदाल-फावड़ा लेकर उतरे ग्रामीण
Ten Singh Thakur
Thu, Oct 8, 2026
25 किलोमीटर के दुर्गम रास्ते पर ग्रामीणों ने खुद बनाई पगडंडी, कुदाल-फावड़ा लेकर उतरे ग्रामीण
दुर्गीपारा में स्कूल भवन, आंगनबाड़ी और सड़क की बदहाली का जिला पंचायत सदस्यों ने लिया जायजा — 10 दिन में काम शुरू कराने की मांग
नारायणपुर। छोटेडोंगर-ओरछा-अबूझमाड़ क्षेत्र के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में विकास की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। ग्राम पंचायत गुदाड़ी के आश्रित ग्राम दुर्गीपारा सहित आसपास के क्षेत्रों का जिला पंचायत सदस्य एवं शिक्षा समिति सदस्य राकेश उसेंडी तथा जिला पंचायत सदस्य गुड्डू उसेंडी ने जमीनी निरीक्षण किया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से सीधे मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया।
25 किलोमीटर का रास्ता, आवागमन बेहद मुश्किल
ओरछा से दुर्गीपारा तक जाने वाला लगभग 25 किलोमीटर का मार्ग, जो प्रसिद्ध हांडावाड़ा जलप्रपात की ओर भी जाता है, आज भी बेहद दुर्गम स्थिति में है। रास्ते में बड़े-बड़े पत्थर और कठिन पगडंडी होने के कारण बाइक सहित सामान्य वाहनों का आवागमन भी मुश्किल है।
ग्रामीणों ने बताया कि राशन, जरूरी सामान और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए उन्हें लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को मुख्य सड़क या अस्पताल तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
कुदाल-फावड़ा लेकर ग्रामीणों ने खुद सुधारा रास्ता
आवागमन की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने स्वयं कुदाल, फावड़ा, गैंती और सब्बल लेकर श्रमदान किया। ग्रामीणों ने रास्ते में पड़े बड़े-बड़े पत्थरों को हटाकर पगडंडी को चलने लायक बनाने का प्रयास किया।
जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के इस प्रयास को मौके पर देखा और उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन के समक्ष रखने का आश्वासन दिया।
10 दिन के भीतर सड़क सुधार कार्य शुरू कराने की मांग
जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी और गुड्डू उसेंडी ने कहा कि गांव के अंतिम छोर तक पहुंचकर जमीनी स्थिति को देखना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याओं का जायजा लिया है।
उन्होंने कहा कि सड़क की वास्तविक स्थिति, ग्रामीणों की परेशानी और मौके के वीडियो को कलेक्टर के संज्ञान में लाया जाएगा। साथ ही प्रशासन से मांग की जाएगी कि अधिकतम 10 दिनों के भीतर सड़क मार्ग के निर्माण अथवा सुधार का कार्य शुरू कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को आवागमन, राशन, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
घोटुल में चल रहा स्कूल, आंगनबाड़ी भवन भी नहीं
दुर्गीपारा में निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक गंभीर समस्या भी सामने आई। गांव में बच्चों के लिए अलग स्कूल भवन उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते घोटुल में स्कूल का संचालन किया जा रहा है। वहीं गांव में आंगनबाड़ी भवन भी नहीं है।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। दुर्गीपारा में शीघ्र स्कूल भवन और आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत कराने के लिए प्रशासन के समक्ष मांग रखी जाएगी।
दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा भी चुनौती
निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी नर्स से भी जनप्रतिनिधियों ने मुलाकात की। ग्रामीणों ने बताया कि दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। सड़क सुविधा के अभाव में किसी मरीज को मुख्य सड़क या अस्पताल तक पहुंचाना स्वयं एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
मंडाली स्कूल में बारिश का पानी कक्षा में
निरीक्षण के दौरान मंडाली स्कूल की स्थिति भी देखी गई। स्कूल भवन में मरम्मत की आवश्यकता सामने आई। ग्रामीणों और शिक्षकों ने बताया कि बारिश के दौरान भवन की छत से पानी टपककर कक्षा के अंदर आता है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को परेशानी होती है।
इसी तरह गुदाड़ी क्षेत्र के स्कूल भवन में भी मरम्मत की आवश्यकता बताई गई। जनप्रतिनिधियों ने संबंधित विभाग से आवश्यक कार्रवाई की मांग करने की बात कही।
“जब रास्ता ही नहीं होगा, तो योजनाएं गांव तक कैसे पहुंचेंगी?”
ग्रामीणों ने बताया कि उचित सड़क नहीं होने के कारण पेयजल, स्वास्थ्य, राशन, भवन निर्माण और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। कई ग्रामीण आज भी नदी-नालों के पानी पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
इस पर जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने कहा—
“सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि गांव के विकास की पहली सीढ़ी है। जब गांव तक रास्ता ही नहीं पहुंचेगा, तो स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य, पेयजल, राशन और शासन की दूसरी योजनाएं कैसे पहुंचेंगी? इसलिए अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर काम होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए नियमित जमीनी निरीक्षण, ग्रामीणों की भागीदारी और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई जरूरी है।
अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने का भरोसा
दोनों जिला पंचायत सदस्यों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को कलेक्टर एवं संबंधित विभागों के समक्ष प्राथमिकता से रखा जाएगा। सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य और पेयजल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अब विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अबूझमाड़ के अंतिम छोर तक जमीनी रूप से पहुंचना चाहिए।
सह संपादक
अर्जुन देवांगन
📞 9424287527
CGFastNews24MPCG
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